May 20, 2024

किसान ने झांसी की जमीन पर पैदा कर दी सोने की फसल

झांसी। विश्व के ठंडे इलाकों पाए जाने वाला विश्व का सबसे कीमती पौधा केसर होता है, इसे सोने की खेती भी कहा जाता है। ठंडे इलाकों में होने वाली इस सोने की खेती को बुंदेलखंड के जनपद झांसी के एक किसान ने झांसी में उसकी फसल पैदा कर दी। जबकि बुंदेलखंड अन्य उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों की अपेक्षा सबसे ज्यादा गर्म और सिंचाई के लिए पानी कम मिलता है। इसके बावजूद भी बुंदेलखंड के किसान ने बता दिया की दिल में जज्बा हो तो पत्थर भी फूल बन जाते है, ओर ठंडे इलाकों में होने वाली इस सोने की फसल को उसने बुंदेलखंड के झांसी में पैदा कर दी। केसर विश्व का सबसे कीमती पौधा है। केसर की खेती भारत के जम्मू के किश्तबाड़ा तथा जन्नत ए कश्मीर के पामपुर के सीमित क्षेत्रों में अधिक की जाती है। केसर यहां के लोगों के लिए वरदान है। क्योंकि केसर के फूलों से निकाला जाता सोने जैसा कीमती केसर जिसकी कीमत बाजार में तीन से साढ़े तीन लाख रुपए किलो बताई जाती है। केसर दिखने वाली इस फसल को झांसी के किसान ने अपने खेत में पैदा कर दी। वह दावा करता है की यह केसर की ही फसल है। होनहार बिरवान के होत चीकने पात्र यह पंक्ति जनपद के विकासखंड गुरसराय क्षेत्र ग्राम अतरौली निवासी हरिओम राजपूत पर सटीक लागू होती है। जिन्होंने पिछडे एवं अभाव ग्रस्त बुंदेलखंडी धरती पर केसर की फसल लहलहा दी हैं। इससे किसानों को कम लागत से अधिक आमदनी होगी। जिले के साधारण परिवार में जन्मे देवकीनंदन के बेटे हरिओम राजपूत ने अपने साथी की सलाह पर केसर की खेती करने का मन बनाया।वह वोने के लिए दिल्ली से की केसर के बीज लाए और खेत की जुताई बखराई कर उसको फसल बोने के लिए तैयार किया। खेत फसल बोने के लिए तैयार होने पर उन्होंने केसर के बीज बो दिए। बीज बोने के उपरांत खेत में अंकुर निकलने से वह प्रसन्न हुए धीरे-धीरे अंकुर पौधे के रूप में तैयार होने लगे करीब 30-35 वर्ष की आयु के राजपूत का हौसला बढ़ा और उन्होंने समय-समय पर फसल को पानी देने एवं निराई गुड़ाई का कार्य किया। उनकी मेहनत रंग लाई और खेत में केसर की फसल लहरा रही है। और फसल पर लगे फूल आसपास के क्षेत्रों में खुशबू बिखेर रहे हैं ।फसल को देखकर सुरेंद्र कुमार सोनी सहित लोगों का कहना है कि यदि यहां के खेतों में केसर की फसल उगाई जाए तो किसानों की आमदनी काफी इजाफा होगा ।उन्होंने सरकार से केसर की खेती करने के लिए किसानों से प्रोत्साहित करने का अनुरोध किया हैं।

रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

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