May 20, 2024

शिक्षा के मंदिर में मासूमों को मिल रही कंडे ओर मलमूत्र की दुर्गंध, घर ले जा रहे बीमारियां

शिक्षाधिकारियो के निरीक्षणों की पोल खोलते माध्यमिक और आंगनबाड़ी स्कूल

झांसी। शिक्षा को लेकर जहां एक केंद्र ओर प्रदेश सरकार खजाने की पोटली खोल रखी है। वही स्कूलों में दबंगों द्वारा किए गए अतिक्रमण इनकी पोल खोल रहे। इन सरकारी स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करने आने वाले नन्हे मुन्ने मासूमों को शिक्षा के ज्ञान से ज्यादा कंडे गोबर और मलमूत्र की दुर्गंध मिलती है। जिसके चलते उनका स्वास्थ्य हमेशा बिगड़ा रहता है और इसी स्थिति के चलते पूरे गांव में बीमारियां भी फैलती है। तस्वीरों ने शिक्षा के नाम पर हो रहे बंदर बांट ओर शिक्षा अधिकारियों के निरीक्षणों की पोल खोल कर रख दी है। साथ ही स्कूलों का सौंदर्य कर्ण भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा हुआ है। यहां होने वाले निर्माण कार्य में मिट्टी और डस्ट सहित पुराने ईट का इस्तेमाल कर सरकार के राजस्व को चूना लगाकर अपनी जेबें भरी जा रही है। जी हां हम बात कर रहे है जनपद झांसी के बबीना विधान सभा के बड़ागांव ब्लॉक मथन पुरा में आने वाले पूर्व माध्यमिक विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र मथनपुरा पहलगांव की। यहां शिक्षा ग्रहण करने के लिए आने वाले मासूम नन्हे मुन्हे बच्चों को सरकार से दी जाने वाली योजनाओं के चलते भोजन किताब आदि तो मिलते ही है साथ यहां शिक्षक भी समय पर आकर अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए बच्चों को पढ़ाते है। लेकिन इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे शिक्षा अपने घर नही ले जाते बल्कि यह बच्चे इन स्कूलों से कंडे और मलमूत्र की लगातार आने वाली दुर्गंध से खुद के अंदर एकत्रित हो रही बीमारियां अपने साथ घर ले जाते है। यहां पढ़ाने वाले शिक्षकों ने बताया की स्कूल की बाउंड्री बॉल का निर्माण कार्य चल रहा लेकिन कुछ दबंग लोग निर्माण कार्य ठीक ढंग से नहीं होने दे रहे क्योंकि दबंग लोग वर्षों से स्कूल की जमीन पर ही अपने जानवर बांधते है और यही कंडे गोबर थोपते है, यही नहीं शिक्षकों ने दबंगों की दहशत के चलते दबी जुबां में बिना नाम बताए यह भी बताया की दबंग लोग स्कूल परिसर में ही क्लास रूम की दीवारों के किनारे शोंच क्रिया करने भी दिन भर आते जाते है, कई बार मना करने पर भी नही मानते जिसकी दुर्गंध से यहां बच्चों पढ़ाना मुश्किल रहता है साथ ही बच्चों के अलावा शिक्षक भी दिन भर आने वाली दुर्गंध के चलते भोजन भी ठीक ढंग से नहीं कर पाते। वहीं सूत्र बताते है की इस स्कूल की प्रिंसिपल कभी कभार ही इस परेशानी के स्कूल आती अन्यथा वह अधिकतर स्कूल से नदारत ही रहती है। वही अब बात की जाए स्कूल की बन रही बाउंड्री बॉल निर्माण की तो उसका ठेका भी एक ऐसे व्यक्ति को मिल गया की स्कूल का सौंदरीय करण भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है। बाउंड्री बॉल एक नंबर की जगह पुराने व तीन नंबर के ईट लगाकर मिट्टी और डस्ट से चिनाई करते हुए ऊपर से सीमेंट का प्लास्टर किया जा रहा ताकि भ्रष्टाचार उजागर न हो। स्कूल की यह दुर्दशा शिक्षा के अधिकारियों के समय समय पर किए जा रहे स्कूलों के निरीक्षणों की पोल खोल रहे। शिक्षा मंदिरों की यह दुर्दशा साबित कर रहे केवल शिक्षा के अधिकारियों का निरीक्षण केवल कागजों में ही चल रहा है।

रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

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