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चौहरे हत्याकांड के आरोपी को मजिस्ट्रेट का फर्जी आदेश बनाने के आरोप में नहीं मिली जमानत

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झांसी। चौहरे हत्याकांड के आरोपी शिशुपाल मैरी को मजिस्ट्रेट का फर्जी आदेश बनाकर झांसी जेल में रुकने के मामले में जमानत देने से इनकार कर उसका जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया है। अभियुक्त शिशुपाल मैरी का काफी लंबा चौड़ा आपराधिक इतिहास होने पर न्यायालय सत्र न्यायाधीश कमलेश कच्छल की अदालत ने कड़ा रुख अख्तियार किया है।

अभियोजन की और से पैरवी कर रहे जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी मृदुलकांत श्रीवास्तव ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2007 में ग्राम नारायण बाग तिराहा पर हुए चोहरे हत्याकांड सहित कई आपराधिक मामलों में जेल में बंद ग्राम मैरी निवासी कुख्यात अपराधी शिशुपाल मैरी ने वर्ष 2018 में हमीरपुर जेल में रहते हुए झांसी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के फर्जी हस्ताक्षर कर फर्जी आदेश बनाया कि उसे दो दिन के लिए झांसी जिला कारागार में रखा जाए। जिसकी जानकारी मिलने पर वादी मुकदमा पुष्पेंद्र उर्फ रिंकू ने इसकी शिकायत करते हुए आदेश की जांच कराने की मांग की। उक्त आदेश कई जेल और प्रशासनिक अफसरों के यहां पहुंचने पर उसकी जांच कराई गई। जिसमे मजिस्ट्रेट का आदेश फर्जी कूट रचित दस्तावेजों का पाया गया। इस पर आरोपी शिशुपाल मैरी के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया। आरोपी जेल में निरुद्ध है। आरोपी की और से जमानत प्रार्थना पत्र न्यायालय सत्र न्यायाधीश कमलेश कच्छल की अदालत में प्रस्तुत किया गया। जिस पर अभियोजन की और से पैरवी कर रहे डीजीसी क्राइम मृदुलकांत श्रीवास्तव ने जमानत देने का विरोध करते हुए न्यायालय को बताया कि आरोपी जघन्य हत्याकांड, गैंगस्टर, लूट, अपहरण जैसे कई संगीन अपराधों का आरोपी है, अगर इसे जमानत दी गई तो वह गवाह और वादी को नुकसान पहुंचा सकता है। न्यायालय ने दोनों पक्ष की सुनवाई के बाद आरोपी शिशुपाल मैरी को जमानत देने से इनकार कर उसका जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया है।

रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

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