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करगुवां जी में चल रहे भक्तामर विधान में बह रही धर्म की बयार

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झांसी। दिगम्बर जैन पंचायत समिति, चातुर्मास समिति एवं सकल जैन समाज झांसी के तत्वावधान में आयोजित पावन वर्षायोग में लीन ससंघ (15 पिच्छी) परम पूज्य गणिनी आर्यिका 105‌ विशाश्री माताजी के पावन सानिध्य में आचार्य विद्यासागर सभागार में विश्व कल्याण की मंगल कामना के साथ चल‌ रहे 48 दिवसीय 1008 भक्तामर महा मण्डल आराधना विधान के पंचम दिवस की मंगल देशना देते हुए आर्यिका 105 विशाश्री माताजी ने भक्तामर ग्रंथ का शाब्दिक बताते हुए कहा कि जिन्होंने ऐसी भक्ति कि वह स्वयं अमर हो गये इसलिए आचार्य मानतुंग स्वामी के द्वारा रचित 48 स्रोतों के इस महान ग्रंथ का नाम भक्तामर रखा गया है। उन्होंने कहा कि जो भी 48 दिनों तक चलने वाले इस विधान में विधि पूर्वक नियम संयम अपनाते हुए आदिनाथ भगवान की भक्ति करता है वह निश्चित ही बड़े भारी पुण्य का भागी होता है। पंचम दिवस शुक्रवार के पुण्यार्जक श्रीमती अलका डा.पी के जैन, (वरिष्ठ चिकित्सक) एवं समस्त परिवार रहे। पं.दीपक कुमार जैन करैरा एवं पारस भैया के संयुक्त संचालन सह पुजारी रोवन जैन, सुरेन्द्र जैन के सहयोग से धार्मिक क्रियायें सम्पन्न कर अर्घ समर्पित किये। संचालन दिगम्बर जैन पंचायत समिति के महामंत्री कमल जैन एवं करगुवां मंत्री एड. शिरोमणि जैन ने किया।अंत में अशोक जैन ने सभी का आभार व्यक्त किया।इस मौके पर डा.अभय कुमार जैन, दीपक जैन वैद्य, प्रियांशु जैन, राजीव जैन, विकास जैन, वीरेंद्र जैन‌ नेडा,श्रीमती मधुवाला जैन, सुनील जैन, संजय जैन,श्रीमती सरोज जैन, गुणमाला जैन,कोटा राजस्थान से आये अतिथि पवन जैन, राहुल जैन, भाभील, वीर, श्रीमती अदिति, श्रीमती बसुधा,प्रीति जैन, डा.निकिता जैन,पूनम जैन, रौनक जैन, कुलदीप जैन, सिद्धार्थ जैन, श्रीमती सरोज जैन, श्रीमती रानी जैन आदि अनेकों श्रद्धालुओं ने विधान में सम्मिलित होकर अर्घ्य समर्पित कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

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