Home Uncategorized सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक पांडुलिपियों को सुरक्षित रखे जाने के निर्देश मुख्य विकास...

सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक पांडुलिपियों को सुरक्षित रखे जाने के निर्देश मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित हुई जिला पुस्तकालय समिति की बैठक

99
0

 

झांसी। पुस्तकालय ज्ञान का स्तम्भ है, संस्कृति का भण्डार और विकास का साधन है। यह एक ऐसा संवृद्ध झरना है जो शिक्षा एवं संस्कृति के विस्तृत क्षेत्र का सिंचन करता है। उक्त उद्गार मुख्य विकास अधिकारी श्री जुनैद अहमद ने विकास भवन सभागार में आयोजित जिला पुस्तकालय समिति की बैठक में अध्यक्षता करते हुए व्यक्त किए।

मुख्य विकास अधिकारी जुनैद अहमद की अध्यक्षता में आयोजित जिला पुस्तकालय समिति की बैठक में पुस्तकालय को और आकर्षक एवं पाठकों को पुस्तकालय में और अधिक पठन पाठन के लिए समय सीमा को बढ़ाए जाने तथा मासिक शुल्क पर विस्तृत चर्चा की गई। उन्होंने पुस्तकालय प्रांगण में निष्प्रयोज्य सामान को विधिसंगत रूप से जल्द से जल्द हटाए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य विकास अधिकारी ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा अत्याधुनिक जिला पुस्तकालय के उद्घाटन उपरांत पुस्तकालय की सुरक्षा के साथ ही वहां सरक्षित लगभग 44000 से अधिक पुस्तकों एवं पांडुलिपियों को सुरक्षित हैं।संपूर्ण पुस्तकालय की सुरक्षा सीसीटीवी कैमरे तथा पीआरडी जवानों के माध्यम से सुनिश्चित है।उसे और सुदृढ़ करने के लिए अतिरिक्त होमगार्ड की व्यवस्था किये जाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि हमारी बहुत- -सी सांस्कतिक विरासत नष्ट हो चुकी होती, यदि वह पुस्तकालयों में सुरक्षित न होती। “पुस्तकालय ज्ञान का संरक्षण करते हैं ताकि उसमें कुछ भी लुप्त न हो जाये, ज्ञान को संगठित करते हैं ताकि कुछ भी व्यर्थ न जाये और ज्ञान को सबकी पहुंच में रखते हैं ताकि कोई भी उससे वंचित न रहे।”पुस्तकालय के बिना स्कूल ऐसे हैं जैसे आत्मा के बिना शरीर।पुस्तकालय स्कूल के शैक्षणिक जीवन का स्नायु-केन्द्र है। यह वास्तविक अर्थों में स्कूल की बौद्धिक कार्यशाला होती है।

बैठक में सीडीओ जुनैद अहमद ने जिला राजकीय पुस्तकालय का पीपीटी के द्वारा नगर निगम द्वारा नगर के विभिन्न महत्वपूर्ण चौराहों पर लगी एलईडी के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय पढ़ने की उचित आदत के निर्माण में सहायता प्रदान करता है। यह पढ़ने में रुचि जाग्रत करता है और स्वतंत्र अध्ययन की आदत का निर्माण करता है। ज्ञान के व्यापक भण्डार को सामने देखकर ज्यादा पढ़ने की इच्छा को प्रोत्साहन मिलता है। इसके अतिरिक्त बच्चों में पुस्तकालय रचनात्मक कार्यों में भी सहायता प्रदान करता है। यह बच्चों/पाठकों को रचनात्मक कार्यों के लिए प्रोत्साहित एवं प्रेरित करता है।

अध्यक्षता करते हुए मुख्य विकास अधिकारी ने विद्यालयों को राजकीय पुस्तकालय का भ्रमण कराए जाने का सुझाव दिया ताकि बच्चों में किताबों के प्रति आकर्षण उत्पन्न हो। उन्होंने बताया की नई शिक्षा नीति के अंतर्गत भी बच्चों को पुस्तकालय का भ्रमण कराया जाना सुनिश्चित कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं।

बैठक में पुस्तकालय आने वाले छात्र छात्राओं एवं अन्य पाठकों के लिए पुस्तकालय खोलने के समय को अतिरिक्त बढ़ाए जाने पर चर्चा की,इसके अतिरिक्त आजीवन सदस्यों सहित नए सदस्यों के पंजीकरण शुल्क एवं मासिक शुल्क के अतिरिक्त नए सदस्यों की पंजीकरण शुल्क एवं वार्षिक शुल्क पर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक का संचालन देवेंद्र सिंह पुस्तकालयाध्यक्ष राजकीय जिला पुस्तकालय झांसी ने किया।

इस बैठक में सहायक निदेशक सूचना सुरजीत सिंह, बीएसई विपुल शिव सहाय, सदस्य जिला पंचायत रोहित राजपूत, पार्षद दिनेश प्रताप सिंह, प्रधानाचार्य जीआईसी सतीश कुमार, अरविंद सिंह परमार एवं अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here