झांसी। भाई की संपत्ति का फर्जी तरीके से बैनामा कर बेचने के आरोप में फंसे शहर के बड़े कारोबारी योगेंद्र प्रेमानी की न्यायालय सत्र न्यायाधीश कमलेश कच्छल की अदालत ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर उसका अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया है।
अभियोजन की और से पैरवी कर रहे डीजीसी क्राइम मृदुलकांत श्रीवास्तव ने जानकारी देते हुए बताया कि भरत प्रेमानी ने 5 नंबर 2025 को थाना नवाबाद रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया था कि उसकी वह सिविल लाइन का निवासी है और उसकी केडी इंफ्रा, डमरू सिनेमा, बसेरा इंडिया, ओम साईं आदि कई कम्पनियां है। जिसमे वह अपने भाई योगेंद्र प्रेमानी के नाम सभी कंपनियां दर्ज है और वह पचास प्रतिशत का पार्टनर है। भरत ने आरोप।लगाया कि उसके भाई योगेंद्र प्रेमानी ने लहर गिर्द वाली जमीन का संपूर्ण हिस्सा फर्जी तरीके से विक्रय कर दिया जिसमें उसकी भी साझेदारी थी। भरत ने आरोप लगाया कि इस जमीन का संपूर्ण हिस्सा फर्जी तरीके से बेचने में योगेंद्र प्रेमानी ने अपने पुत्र के गवाह में हस्ताक्षर कराए। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी थी। इधर योगेंद्र प्रेमानी ने न्यायालय सत्र न्यायाधीश की अदालत में अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करते हुए जरिए अधिवक्ता बताया कि योगेंद्र प्रेमानी बेकसूर है, निर्दोष है, उसे व उसके पुत्र को व्यापारिक विवाद के चलते फर्जी तरीके से मुकदमे में फसाया जा रहा है। उसने अग्रिम जमानत आवेदन में बताया कि उसके व पुत्र के खिलाफ दर्ज कराई गई एफआईआर में कही भी घटना का समय व दिनांक नहीं लिखा गया है। न्यायालय ने अभियोजन और आरोपी पक्ष सुनने के बाद गंभीर अपराध का आरोप होने पर आरोपी को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर उसका जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया है।
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

