
झांसी। शास्त्री विश्व भारती संस्कृति एवं साहित्य शोध संस्थान सीपरी बाजार शास्त्री भवन में मासिक साहित्यिक सरस काव्य संगोष्ठी सम्पन्न हुई। गोष्ठी की अध्यक्षता डॉ० पी० के० अग्रवाल (आई०ए०एस० सेवा निवृत) द्वारा की गई। गोष्ठी के मुख्य अतिथि डॉ. बी. बी. त्रिपाठी [निदेशक संस्कृत शोधपीठ, बुन्दे० विश्वविद्यालय झांसी] एवं विशिष्ट अतिथि डॉ. निहालचन्द शिवहरे, डॉ० प्रताप नारायण दुबे, राजगोस्वामी (दतिया) दिलशेख ‘दिल’, डॉ० ए० के० हिंगवासिया, हरशरण शुक्ल, सतीश कुमार (प्राचार्य जी०आई० सी०) आलोक शांडिल्य, श्रीमती मालती शिवहरे रहे। डॉ. ब्रजलता मिश्रा द्वारा सरस्वती-बन्दना प्रस्तुत की गई। जी०पी०झा के शंखवादन से गोष्ठी का शुभारम्भ हुआ। इस अवसर पर डॉ० निहालचन्द्र शिवहरे द्वारा रचित सौ हाइकु काव्य संग्रह “हाइकु सरिता” का विमोचन किया गया। तत्पश्चात डॉ० बी. बी. त्रिपाठी द्वारा रचित “रामराजीय शतकम्” (संस्कृत एवं हिन्दी भावार्थ सहित), डॉ० पी० के० अग्रवाल द्वारा युवा पीढ़ी को प्रेरित करने वाली पुस्तक ‘गीता और युवा ” का विमोचन किया गया। संस्थान की ओर से सभी पुस्तक रचनाकारों का शाल, श्रीफल, पटका पहनाकर सम्मान किया गया। गोष्ठी में डॉ. रामशंकर भारती द्वारा हाइकु सरिता पुस्तक की उत्कृष्ट एवं प्रभावी समीक्षा की गई। डॉ० सुश्री नीति शास्त्री द्वारा अतिथियों का स्वागत एवं राष्ट्रभाषा हिन्दी के महत्व पर प्रकाश डाला गया। काव्य पाठ की सरस प्रस्तुति करते हुए क्रमश : डॉ० सुखराम चतुर्वेदी फौजी, कैलाश नारायण मालवीय रामबिहारी सोनी तुक्कड़, श्रीमती संध्या निगम, श्रीमती ब्रजलता मिश्रा, रचना तिवारी, विजय प्रकाश सैनी श्यामशरण नायक, अताउल्लाह खान, ज़ब्बार शारिख, तेजभान सिंह बुन्देला ममता श्रीवास, मीरा अग्रवाल हरिशंकर वाल्मीकि (शंकर) बलराम सोनी, संजय तिवारी राष्ट्रवादी, शरद मिश्र, रामलखन सिंह परिहार, जे. पी. झा, सुधा सक्सेना, हरशरण शुक्ल, कामता प्रसाद प्रजापति, डॉ. बी. बी. आर्य, डॉ. अशोक शादिल्य, ए. के. सिंह रहित मुख्य अतिथि सभा अध्यक्ष समस्त विशिष्ट अतिथियों ने श्रेष्ठ सार्थक रचनाओं की प्रस्तुति देकर गोष्ठी को सार्थकता प्रदान की। इस अवसर पर गौरीशंकर उपाध्याय “सरल” अब्दुल रशीद, ए. बी. मजूमदार (वैज्ञानिक) काशीराम, मंगल सेन, विभा पांड्या, सुभाष चंद्र, शीलू गौतम, नीरज सिंह सहित अनेक श्रोतागढ़ उपस्थित रहे। गोष्ठी का संयुक्त संचालन डॉ. सुश्री नीति शास्त्री एवं महाकवि सुखराम चतुर्वेदी (फौजी) द्वारा किया गया। अंत में कई नेमी चंद जैन के निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मौन धारण कर गोष्ठी का समापन आभार ज्ञापन से किया गया।
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

