Home Uncategorized चिंता नहीं चिंतन कर स्वयं को‌ शोक रहित बनायें : विशाश्री माताजी

चिंता नहीं चिंतन कर स्वयं को‌ शोक रहित बनायें : विशाश्री माताजी

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झांसी। अतिशय क्षेत्र करगुवांजी में चल रहे 48 दिवसीय 1008 भक्तामर महा मण्डल आराधना विधान के छत्तीसवें दिन सोमवार को गणिनी आर्यिका 105 विशाश्री माताजी ने मंगल देशना देते हुए कहा कि भावना का फल ही हमें प्राप्त होता है। इसलिए भक्ति भावना के साथ ईश्वर की आराधना करते हुए स्वयं को शोक रहित बनायें। उन्होंने कहा कि मोहनी कर्म की एक कषाय शोक है, अतः चिंता न कर चिंतन करें। जीव जब जब चिंता छोड एकाग्र होकर परमात्मा का चिंतन करता है तब तब चिंतन करते करते चिरंतन को प्राप्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि जिस वृक्ष के नीचे बैठकर भगवान ने तप किया वह वृक्ष भी शोक रहित अर्थात अशोक बन‌ गया लेकिन मनुष्य को अब तक अशोक वृक्ष की तरह फल की प्राप्ति नहीं हुई , इसलिए ऐसी भावना बनाकर प्रभु से प्रार्थना करें कि मेरी भक्ति निरर्थक न हो जाये।

इससे पूर्व सोमवार के पुण्यार्जक श्रीमती मुन्नी देवी जैन, रेखा संजय जैन,रौनक जैन, मुस्कान सौरभ जैन छतरपुर(समाधिस्थ आचार्य परस सागर महाराज के परिजन) रहे, जिन्होंने शांतिधारा का सौभाग्य प्राप्त किया, माताजी को शास्त्र भेंटकर पाद प्रक्षालन कर पं दीपक जैन करैरा के मार्गदर्शन में समस्त धार्मिक क्रियायें सम्पन्न कराते हुए अर्घ समर्पित किये।

तदुपरांत पुण्यार्जक परिवारों का माला एवं पगड़ी पहनाकर दिगम्बर जैन पंचायत समिति के पदाधिकारियों ने सम्मानित किया।संचालन करगुवांजी मंत्री एड.शिरोमणी जैन ने किया।अंत में निर्माण मंत्री भागचंद जैन ने सभी काम आभार व्यक्त किया। इस मौके पर श्वेता जैन शैली जैन प्रिया जैन रानी भागचंद जैन प्रीति शिरोमणि जैन शशि जैन जनित ज्योति दीपक जैन किरण जैन शुभी जैन सत्यजीत जैन मयंक जैन कुलदीप जैन राजेंद्र जैन बिजना वाले सीए निमेष भंडारी,चौधरी जिनेंद्र जैन तालबेहट, वीरेंद्र जैन नेडा बालचंद जी जैन आदि मौजूद रहे।

रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

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