April 15, 2024

तीन दिवसीय समग्र मछली पालन की वैज्ञानिक विधिओं पर प्रशिक्षण का हुआ समापन

झाँसी। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्-केन्द्रीय मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान, मुम्बई एवं रानी लक्ष्मी बाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी के संयुक्त तत्त्वाधान में अनुसूचित जाति उप-योजना (एससीएसपी) के अंतर्गत तीन दिवसीय समग्र मछली पालन की वैज्ञानिक विधिओं पर प्रशिक्षण का समापन हुआ। इस प्रशिक्षण से बुंदेलखण्ड क्षेत्र के मछली पालक उत्कृष्ट मछली बीज उत्पादन में सक्षम होंगे साथ ही साथ समग्र मछली पालन की नई तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए भविष्य में इस क्षेत्र में जल संरक्षण को बढ़ावा एवं मत्स्य उत्पादन को दोगुनी करने का भी लक्ष्य हैं। कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने मछली पालकों को मत्स्य पालन के नवीनतम तकनीकों को अपना कर उत्पादन बढ़ाने की सलाह दी। डॉ. संजय शुक्ला, पूर्व मत्स्य संयुक्त निदेशक ने प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान को अपनाने की सलाह दी। डॉ. एस एस सिंह ने बताया की बुंदेलखंड में तालाब एवं छोटे – छोटे तालाबों के कारण मछली पालन में बढ़ोतरी हुई है। इसमें छोटे-छोटे किसानों के समूह अथवा एफपीओ बनाकर मत्स्य पालन करने की सलाह दी। अधिष्ठाता मात्स्यिकी महाविद्यालय डॉ. बी.के. बेहेरा ने बताया कि बुंदेलखण्ड के मछली पालकों को इस प्रशिक्षण के तहत उत्तम बीज तथा मछली खाद्य्य उपलब्ध कराया जायगा। इस प्रकार के प्रशिक्षण द्वारा इस क्षेत्र के मछली पालक आत्मनिर्भर हो सकेंगे एवं अन्य राज्यों पर निर्भरता भी खत्म होगी, इससे ग्राहकों को ताजी मछलीयाँ भी प्राप्त होंगी। उन्होंने बताया की भविष्य में केन्द्रीय मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान, मुम्बई के साथ इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा। इस प्रशिक्षण से बुंदेलखण्ड क्षेत्र के मछली पालक उत्कृष्ट मछली बीज उत्पादन में सक्षम होंगे। इस प्रशिक्षण में झाँसी एवं दतिया जिले के 25 किसानों ने भाग लिया जिनमे अधिकांश किशोर एवं महिलाएँ शामिल हैं। सभी मछली पालकों को प्रशिक्षण का प्रमाण पत्र भी दिए गए। इसी के साथ-साथ प्रशिक्षण के अंतिम दिन में विश्वविद्यालय ने मत्स्य पालन में अग्रिम पंक्ति प्रदर्शनी हेतु समाज के कमजोर वर्ग के 15 किसानों के लिए मछली बीज, चारा, सरसों की खली, चूना आदि वितरित किये गए। इस अवसर पर डॉ नीलेश कुमार, डॉ. पीयूष बबेले, डॉ. संजीव कुमार,सत्यनारायण परिडा,अजय कुमार राउत, चरन सिंह कुशवाहा आदि उपस्थित रहे। संचालन डॉ. नीलेश कुमार एवं आभार व्यक्त डॉ. पार्थ सारथी त्रिपाठी ने किया।

रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

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