March 4, 2024

योगी जी आप कुछ भी कर लो, हम नही सुधरेंगे, झांसी की जनता को लुटवाते रहेंगे, क्योंकि इनके खिलाफ कभी कार्यवाही नही होती

झांसी। भले ही योगी सरकार जनता को निशुल्क स्वास्थ्य सेवाए उपलब्ध कराने का कितना भी दंभ भरती हो और कितने भी सरकारी डॉक्टरों को बाहर की दवाएं लिखने पर चेतावनी देती हो लेकिन धरातल पर यह सब शून्य है। क्योंकि झांसी के जिला अस्पताल के डॉक्टर बाहर की ही दवाएं लिखते है, वह भी इसलिए लिखते है क्योंकि उनके खिलाफ कई शिकायते होने के बाद भी कार्यवाही नही हुई। लोगों का कहना है जिला अस्पताल के बाहर स्थित मेडिकल स्टोर वालों का जिला अस्पताल के डॉक्टरों से सिस्टम सेट है। इसलिए सरकार कितना भी चिल्लाए डॉक्टर बाहर की ही दवाएं लिखेंगे। जनपद झांसी के जिला अस्पताल में सरकार की निशुल्क चिकित्सा सेवा का लाभ उठाने के लिए आम जनता जाती है। लेकिन उस जनता को क्या पता की सरकार की तनख्वाह पाने वाले डॉक्टर अपने कर्तव्यों का ठीक तरह से निर्वहन न करते हुए सिर्फ अपनी जेब भरने के लिए अस्पताल के बाहर बनी मेडिकल स्टोर वालों से सेटिंग के तहत उन्हें बाहर की ही दवाएं लिखते है। सूत्र बताते है, मेडिकल स्टोर वाले एक दवा के पर्चे पर डॉक्टर को बीस प्रतिशत देते है। इसलिए सरकार द्वारा जिला अस्पताल में स्थापित जन औषधि की दवाएं न लिख कर बाहर के मेडिकल स्टोरों की दवाएं लिखते है। एक मरीज का कम से कम पांच सौ से एक हजार से कम का मेडिकल वाले बिल नही बनाते। जनता सरकार की स्वास्थ्य सेवा का लाभ लेने जिला अस्पताल जरूर जाता है, लेकिन डॉक्टर के द्वारा बाहर से मंगाई गई दवाओं के बाद वह अपने आप को ठगा सा महसूस करता है। यह डॉक्टर इसलिए और लापरवाह है क्योंकि इनके खिलाफ कईयों बार शिकायत हुई, कईयों बार जिले के अधिकारियों ने निरीक्षण किया लेकिन सब देख कर अनजान बने है इनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं होती इसलिए बेपरवाह बने है डॉक्टर जनता लुट रही है, अधिकारी और जनप्रतिनिधि सो रहे है।

हाई स्कूल फैल दे रहे दवाएं, जनता की जान से हो रहा खिलबाड़

झांसी। अवैध तरीके से दवाएं बेचने पर पाबंदी लगाने की जिम्मेदारी लेने वाले विभाग के अफसरों की नाक के नीचे जनता की जिंदगी से खिलवाड़ हो रहा। जिला अस्पताल की नाक के नीचे बने दर्जनों मेडिकल स्टोरों पर एक एक फार्मासिस्ट है, वह कभी होता है कभी नही। लेकिन कुछ मेडिकल स्टोरों पर काम करने वाले जो मरीजों को पर्चा लेकर दवाएं देते है वह फार्मासिस्ट नही हाई स्कूल फैल या पास ही होंगे उनके पास दवाएं देने का कोई प्रमाण नहीं होगा। ऐसा नहीं की स्वास्थ्य अधिकारियों को इसकी जानकारी न हो सब जानकारी होने के बावजूद भी जानकर अंजान बने रहते है। आखिर इन पर कार्यवाही क्यों नही होती।

रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

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