May 20, 2024

बुन्देलखण्डी साहित्य को संरक्षित करने के लिये मण्डलायुक्त की अनोखी पहल गुमनाम से नाम की ओर रचनाकारों से प्रकाशन हेतु मांगी जा रहीं है पाण्डुलिपियाँ

झाँसी। मंडलायुक्त डॉ0 अजय शंकर पाण्डेय ने कार्यभार ग्रहण करने के उपरान्त अप्रकाशित बुन्देली साहित्य को संकलित करने, उनका मानकीकरण कर प्रकाशित करने की योजना घोषित की थी, इसके लिये साहित्य उन्नयन समिति का गठन किया गया था इसमें उन लेखकों एवं साहित्यकारों को प्रोत्साहन देने की बात थी जो आर्थिक कारणों, उचित प्लेटफार्म न मिलने के कारण अपनी रचनाओं का प्रकाशन कराने में विफल रहते थे। मण्डलायुक्त डॉ0 अजय शंकर पाण्डेय के इस प्रयास से जहां बुन्देली साहित्यकारों को एक संजीवनी मिली है वहीं बुन्देली भाषा में लिखने वाले कवियों, साहित्यकारों, लेखकों व अन्य रचनाकारों की लिखी पाण्डुलिपियों को संकलित कराकर उनके प्रकाशन की व्यवस्था की जा रही है। इस अभियान को गुमनाम से नाम की ओर नाम दिया गया है। मण्डलायुक्त के सुझाव पर बुन्देलखण्ड साहित्य उन्नयन समिति द्वारा विगत तीन माह में अनेक रचनाकारों की पाण्डुलिपियों को संकलित कराया गया है जिसे प्रकाशकों को उपलब्ध कराकर प्रकाशन के लिये व्यवस्था की गई है।*गुमनाम से नाम की ओर श्रृंखला की प्रथम कड़ी में प्रकाशित होने वाली बुन्देली भाषा की पाण्डुलिपियां -1- श्री गीता जल श्रीमद्भगवद्गीता का काव्यानुवाद – ओमप्रकाश मिश्र2- केशव कहानी संग्रह – गीतिका वेदिका3- झांसी की रानी नाटक – विजय शंकर करौलिया4- उटकाने बुंदेली दोहा संग्रह – राजीव नामदेव राना लिधौरी5- बुन्देलखण्ड की लोक परम्परा एवं रीति रिवाज – पन्नालाल ‘असर’6. पदचिह्न गीत संग्रह वैभव दुबे7. बुंदेलखंड की सांस्कृतिक विरासत लेखक रामप्रकाश गुप्त8. उतरता चांद धरती पर कविता संग्रह कवयित्री सुमन मिश्रा9. झांसी के राजा नाटक आरिफ शहडोली10. तुम हो तो कविता संग्रह डॉ रामशंकर भारती11. महुआ चुए आधी रात बुंदेली ललित निबंध संग्रह डॉ रामशंकर भारती12. बुंदेलखंड के कथाकार संपादक डॉ पुनीत बिसारिया. बुन्देलखण्ड की साहित्यक धरोहर बहुत ही समृद्ध है परन्तु लंबे समय से यहाँ के रचनाकारों को समुचित अवसर न मिलने से उनके साहित्य को नाम नहीं मिल पाया है। मण्डलायुक्त की पहल पर देश के विभिन्न प्रकाशकों से सम्पर्क किया गया है जिसमें कुछ प्रकाशकों ने अपनी सहमति दी है। अब तक किये गये प्रयासों में 12 रचनाकारों की पुस्तकों के प्रकाशन को अन्तिम रूप दिया जा रहा है। बुन्देलखण्ड की सभी रचनाकारों को एक बार पुनः कवियों, साहित्यकारों, लेखकों व अन्य रचनाकारों से प्रकाशन हेतु पाण्डुलिपियाँ उपलब्ध कराने का अवसर दिया जा रहा है। यहाँ यह भी व्यवस्था की गई है यदि कोई रचनाकार अब इस दुनिया में नहीं है तो उनके परिजन/मित्र भी उनकी रचनाओं के प्रकाशन के लिये साहित्य उन्यन समिति से सम्पर्क कर सकते हैं। साहित्य उन्नयन समिति द्वारा एक संपादन समिति का गठन किया गया है। प्रकाशन हेतु पाण्डुलिपियाँ उपलब्ध कराये जाने हेतु हिन्दी की पाण्डुलिपियों के लिये बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के हिन्दी विभागाध्यक्ष डा. पुनीत बिसारिया (मो0न0 9450037871) बुन्देली की पाण्डुलिपियों के लिये पन्नालाल असर (मो0न 7084912130) से सम्पर्क किया जा सकता है। मण्डलायुक्त डॉ0 अजय शंकर पाण्डेय ने जहां बुन्देलखण्ड की कला एवं संस्कृति को संरक्षित करने, संवर्द्धित करने एवं देश के मानचित्र पर उचित स्थान दिलाने के लिये साहित्य उन्नयन समिति का गठन किया गया था इसी कड़ी में बुन्देलखण्ड में चित्रकला, नृत्यकला, संगीत कला के संवर्द्धन हेतु अनेक स्तर पर विशेष प्रयास किये जा रहे हैं।

रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

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