झाँसी। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी में आज देश के राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम्” की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह गीत महान कवि एवं उपन्यासकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 7 नवम्बर 1875 को लिखा गया था, जिसने देश के स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा और चेतना प्रदान की।कार्यक्रम के प्रारंभ में विश्वविद्यालय परिवार द्वारा वंदे मातरम् का सामूहिक गायन किया गया। इस अवसर पर उपस्थित सभी अधिकारियों, संकाय सदस्यों, कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं ने तिरंगे के साथ मातृभूमि को नमन किया। पूरा परिसर राष्ट्रभक्ति की भावना से ओतप्रोत हो उठा।कार्यक्रम के दौरान सभी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाइव संबोधन का अवलोकन किया। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि “वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि यह भारत की आत्मा और देशभक्ति की सजीव ध्वनि है।”वर्ष 1896 में महाकवि रवीन्द्रनाथ टैगोर ने “वंदे मातरम्” गीत को पहली बार सार्वजनिक तौर पर कोलकाता में गया था। बाद में 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा द्वारा इसे राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकृत किया गया।विश्वविद्यालय के कुलपति की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में सभी अधिकारी, विभागाध्यक्ष, शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक कर्मचारी तथा विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।यह आयोजन देश की स्वतंत्रता, एकता और अखंडता के प्रति समर्पण तथा “वंदे मातरम्” की अमर भावना को पुनः स्मरण कराने वाला रहा।
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा






