झांसी। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी में मंगलवार को संविधान दिवस बड़े ही गरिमामय वातावरण में मनाया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने अधिकारियों, विभागाध्यक्षों, वैज्ञानिकों और कर्मचारियों के साथ मिलकर संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन किया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे मूल सिद्धांतों को सुदृढ़ करना रहा। कुलपति ने सभी अधिकारीयो व कर्मचारियों को संविधान की शपथ दिलाते हुए कहा कि—
“यह आयोजन हमारी उस सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसके बल पर हम राष्ट्र निर्माण और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा कर सकते हैं।”
*भौगोलिक उपदर्शन (GI) पर ओरिएंटेशन सत्र*
*पद्मश्री डॉ. रजनीकांत मुख्य वक्ता के रूप में रहे उपस्थित*
संविधान दिवस समारोह के बाद विश्वविद्यालय में भौगोलिक उपदर्शन (Geographical Indication—GI) पर विशेष ओरिएंटेशन सत्र आयोजित किया गया। इसकी अध्यक्षता कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने की, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में पद्मश्री, जनरल सेक्रेटरी—ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन, वाराणसी डॉ. रजनीकांत उपस्थित रहे।
उन्होंने जीआई टैग से मिलने वाली कानूनी सुरक्षा, आर्थिक लाभ, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में उपयोगिता तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
उत्तराखंड से शुरू हुआ जीआई का सफर, आज देश का सम्मान
डॉ. रजनीकांत ने बताया कि भारत में जीआई का कानून 1998 में प्रारंभ हुआ और 1999 में संसद से पारित किया गया।
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी का विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी दूरदृष्टि के कारण ही भारत में जीआई कानून लागू हो सका।
मुख्य वक्ता ने आगे बताया कि उत्तर प्रदेश आज ODOP (One District–One Product) योजना के कारण जीआई टैग के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बन चुका है।
इस दिशा में पूर्व मुख्य सचिव डॉ. अनूप चंद पांडेय और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयास उल्लेखनीय रहे हैं।
*बुंदेलखंड के विशिष्ट उत्पाद—जीआई क्षमता से भरपूर क्षेत्र*
सत्र के दौरान डॉ. रजनीकांत ने बुंदेलखंड और आसपास के क्षेत्रों के प्रमुख उत्पादों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि—
बरुआसागर का अदरक,
बनारस की साड़ी, बुंदेलखंड का काठियां गेहूं,
मध्य प्रदेश का शरबती गेहूं,
चन्देरी की साड़ी
पहले ही जीआई टैग प्राप्त कर चुके हैं।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि—
“भविष्य में जब भी बुंदेलखंड से कोई नया जीआई उत्पाद चिन्हित होगा, उसमें *रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी* की महत्वपूर्ण भूमिका अवश्य होगी।”
*जीआई टैग से बढ़ती वैश्विक पहचान*
डॉ. रजनीकांत ने बताया कि जीआई टैग मिलने के बाद उत्पाद को विशेष कानूनी सुरक्षा प्राप्त होती है। यदि कोई संस्था नकली जीआई टैग लगाकर उत्पाद बेचती है, तो उस पर लाखों रुपये का जुर्माना और तीन माह तक कारावास का प्रावधान है।
आज भारत के जीआई उत्पाद दुबई, अमेरिका, यूरोप सहित वैश्विक बाजारों में अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं और देश का गौरव बढ़ा रहे है।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि हमें पारंपरिक कृषि उत्पादों की विशिष्टता और मौलिकता को संरक्षित कर अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने की दिशा में गंभीर प्रयास करने होंगे।
उन्होंने कहा—
“जो उत्पाद आज हमें सामान्य लगते हैं, वही आने वाले 100 वर्षों में अत्यंत मूल्यवान धरोहर बन सकते हैं। इसलिए जीआई टैग कृषि समुदाय के लिए अत्यंत आवश्यक है।”
सत्र में प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. सुशील कुमार सिंह ने मुख्य अतिथि डॉ. रजनीकांत का पुष्पगुच्छ व सोल उड़ाकर स्वागत किया।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से विवि के सभी अधिकारी, प्रखर कुमार, कृषि विपणन एवं कृषि विदेश व्यापार निदेशालय, उत्तर प्रदेश,गंगा दयाल, सहायक निदेशक,सहायक कृषि विपणन अधिकारी, झांसी मंडल,नाबार्ड के प्रतिनिधि,एफपीओ प्रतिनिधि,विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष उपस्थित रहे।
सभी उपस्थित प्रतिभागियों ने जीआई टैग के महत्व और स्थानीय उत्पादों के उत्थान में इसकी भूमिका पर विस्तृत चर्चा की।
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा


