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पुरात्तव विभाग के नियमों की उडाई जा रही पार्किंग को लेकर धज्जियांबाहरी कंपनी को दिया जा रहा पार्किंग का ठेकानगर निगम का कंपनी से अनुबंध शक के दायरे में

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झांसी। महानगर में पार्किंग की व्यवस्था में सुधार लाने के लिए नगर निगम के द्वारा बेंगलुरु की कंपनी मै.आईआरएएम टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड बेंगलुरू के साथ 15 वर्षों के लिए ग्रास प्रॉफिट 30 प्रतिशत या 5 लाख प्रति वर्ष के हिसाब से नगर निगम को दे होगा।उक्त अनुबंध 15 वर्षों के लिए किया गया है और इसका भूमि पूजन भी हो गया। 6 माह में यह कार्य पूर्ण होना है। नगर निगम के द्वारा जो अनुबंध किया गया है जिसमें पूर्व में नगर निगम को एक पार्किंग से अच्छी खासी रकम प्राप्त प्रतिवर्ष होती थी। लेकिन पीपी मॉडल पर इस कार्य को करने के लिए नगर निगम के द्वारा किले की तलहटी के पास मोतीलाल कंपलेक्स में पार्किंग बनाने का भी ठेका दे दिया गया। जबकि नगर निगम को पुरातत्व विभाग के नियमों के अनुसार किले की 100 मीटर की परिधि तक किसी प्रकार का कोई निर्माण नहीं होने का नियम शायद मालूम नहीं है। जबकि पुरातत्व विभाग के द्वारा मोतीलाल कंपलेक्स के बाहर सड़क के दूसरी ओर मकान बनाने पर उन्हें कानून बताया जाता है और मकानों का निर्माण नहीं होने दिया जाता। लेकिन नियमों को ताक में रखकर पार्किंग का ठेका बाहरी कंपनी को दिया गया है जिसमें पीपी मॉडल पर पार्किंग शहर में बनाए जाएंगे। झांसी महानगर में ठेकेदारों व इंजीनियर की कमी नहीं है और यहां के लोगों को रोजगार न देते हुए बाहरी लोगों के साथ अनुबंध करना यह प्रश्नचिन्ह लगाता है। आखिर ऐसी क्या बात है जो बाहरी कंपनी को एक वर्ष का 5 लाख रुपये में पार्किंग का ठेका दिया जा रहा है। झांसी महानगर में ऐसे कई ठेकेदार है जो यह रकम दे सकते हैं लेकिन उनको यह ठेका नहीं दिया जाएगा। 15 साल अनुबंध होने का मतलब बाहरी कंपनी के द्वारा पूरी तरह जमीन पर काबिल होना है और बाद में विवाद की स्थिति हो जाएगी। कई कंपनियां नगर निगम में बाहर से आई और नगर निगम को लाखों का चूना लगा कर चली गई । शहर में मिड़ास कंपनी नगर निगम में प्रचार प्रसार का कार्य करने आई थी और नगर निगम को लाखों का चूना लगा कर चली गई। यह बात नगर निगम के अभिलेखों में दर्ज है। सरकार की कोई भी योजना होती है जिसका लाभ जनहित में हो लेकिन जनहित का नुकसान नहीं हो ऐसा सरकार नहीं चाहती शहर के लोगों को रोजगार मिले यह सरकार का संकल्प है लेकिन शहर में निर्माण कार्य व सौंदर्यकरण का ठेका बाहरी कंपनियों को दिया जाना सौदेबाजी का प्रतीक होता है। इसमें किसको कितना लाभ हो रहा है यह साफ नजर आ रहा है। फ़िलहाल जनता का कहना है श्री मोतीलाल कंपलेक्स में जो पार्किंग बनाई जा रही है वह नियम अंतर्गत गलत है और नियमों को ताक में रखकर जो कार्य किया जा रहा है वह जनता के एवं पुरातत्व के हित में नहीं है इस मामले में पुरातत्व विभाग द्वारा कोई कार्यवाही अमल में नहीं लाई जाती है तो तो निश्चित है कि पार्किंग को लेकर कोई बहुत बड़ी सौदेबाजी हो रही है जिसमें कुछ समाजसेवियों का कहना है कि इस मामले में मुख्यमंत्री व जिलाधिकारी व पुरातत्व विभाग को भी ज्ञापन पत्र दिया जाएगा।

रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

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