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रेशम की डोरी ने तोड़ी मजहब की दीवार, समाजसेवी संदीप को मुस्लिम बहनों ने बांधी राखी

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झांसी। रक्षा बंधन त्योहार एक ऐसा त्योहार है जहां हर बहन अपने भाई की हाथ की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है, ओर हर भाई अपनी बहन की रक्षा करने का संकल्प लेता है। यह त्योहार हिंदू मुस्लिम नही बनाता बल्कि हर भाई कलाई पर राखी बांधने वाली हर महिला, नारी शक्ति को उसका भाई होने के साथ साथ सुरक्षा करने का वचन देता है। जन्माष्टमी त्योहार पर भी राखी बांधने का शगुन होता है। जहां एक और हजारों बहने अपने भाईयो की कलाई पर राखी बांध रही थी। वही दूसरी ओर एक अलग ही नजारा देखने को मिला। जहां एक रेशम की डोर ने मजहब की दीवार तोड़ दी। शहर झांसी के समाज सेवी डॉक्टर संदीप सरावगी जहां जन्माष्टमी पर उन बहनों से राखी बंधवा रहे थे जो रक्षा बंधन पर किसी कारण बस नही मिल पाई या उन्हे राखी नही बांध पाई। ऐसे में एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने मजहब की दीवार तोड़ दी। एक मुस्लिम महिला शहर क्षेत्र निवासी सबा खान दबंग ने समाज सेवी संदीप सरावगी के हाथ की कलाई पर रक्षा सूत्र राखी बांधी। वही संदीप सरावगी ने भी सबा खान को भाई बनकर उसकी हमेशा रक्षा करने का बचन दिया। इस दौरान सबा खान ने कहा कि मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना हिंदू है हम वतन है हिंदुस्तान हमारा।

रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

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