
झांसी। आज मंत्री, महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग, उ०प्र० शासन श्रीमती बेबी रानी मौर्य के मुख्य आतिथ्य में माता अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं (त्रिशताब्दी) जन्म जयंती के अवसर पर उनके व्यक्तित्व एवं योगदान को सम्मानित करते हुये कायर्क्रम का आयोजन पं० दीनदयाल उपाध्याय, सभागार में किया गया। कायर्क्रम में सदस्य विधान परिषद उ0प्र0 श्रीमती रमा निरंजन, सदस्य राज्य महिला आयोग उ0प्र0 श्रीमती अनुपमा सिंह लोधी, जिला पंचायत अध्यक्ष पवन कुमार गौतम, विधायक सदर रवि शर्मा, विधायक गरौठा जवाहर लाल राजपूत, सदस्य विधान परिषद रामतीर्थ सिंघल, जिलाध्यक्ष महानगर भाजपा हेमन्त परिहार, जिलाध्यक्ष ग्रामीण प्रदीप पटेल, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष राकेश पाल, पूर्व जिलाध्यक्ष जयदेव पुरोहित सहित ब्लाॅक प्रमुख, बीडीसी एवं ग्राम प्रधान गणमान्य अतिथि के रुप में उपस्थित रहे। कायर्क्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि सहित उपस्थित अन्य अतिथियों द्वारा पुण्यश्लोक देवी अहिल्याबाई के चित्र पर दीप प्रज्जवलन एवं माल्यापर्ण कर किया गया। इसके पश्चात स्वागत की बेला में मुख्य विकास अधिकारी जुनैद अहमद द्वारा कायर्क्रम में उपस्थित मुख्य अतिथि सहित उपस्थित अन्य अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया गया। तत्पश्चात विद्यालय की छात्राओं द्वारा अतिथियों के सम्मान में स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। कायर्क्रम में मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित मंत्री, महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग, उ०प्र० शासन श्रीमती बेबी रानी मौर्य ने अपने सम्बोधन में कहा कि पुण्यश्लोक देवी अहिल्याबाई होल्कर भारतीय इतिहास की उन महान नारियों में से हैं, जिन्होने नारी शक्ति, प्रशासनिक दक्षता और धर्म-परायणता का ऐसा अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया हैं, जिसकी स्मृति आज भारतीय जनमानस में श्रद्धा के साथ अंकित हैं। उन्होने कहा कि माता अहिल्याबाई होल्कर एक साधारण परिवार में जन्मीं बालिका हैं, जो भगवान शिव की उपासक रहीं। वह तत्कालीन में समय में एक ऐसी न्यायप्रिय रानी रहीं, जिन्होंने जीवन पयर्न्त धमर् के मागर् का अनुसरण किया। मध्यकाल की विषम परिस्थितियों में लोकमाता अहिल्याबाई ने अपने अदम्य साहस और शौयर् का परिचय देते हुये तत्कालीन शासकों द्वारा विध्वंस किये गये मन्दिरों का पुनर्निमार्ण कराया, जिनमें गुजरात का सोमनाथ मन्दिर, वाराणसी का काशी-विश्वनाथ मन्दिर, उत्तराखण्ड का बद्री-केदारनाथ धाम मन्दिर, उज्जैन का महाकालेश्वर मन्दिर, मध्य प्रदेश का ओंकारेश्वर मन्दिर, महाराष्ट्र का भीमाशंकर मन्दिर, तमिलनाडु का रामेश्वर मन्दिर एवं कनार्टक का गोंकणर् शिव मन्दिर सम्मिलित हैं। उन्होने कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक खण्डित हुये मन्दिरों का जीर्णोद्वार कराने के साथ ही सनातन संस्कृति के गौरव को पुनजीर्वित करने का कायर् भी किया। रानी अहिल्याबाई आदर्श शासन की शिल्पकार रहीं, जिसके तहत उन्होने सन् 1767 में रानी अहिल्याबाई ने महेश्वर में हथकरघा आधारित कुटीर उद्योग स्थापित किया। इसके साथ ही गुजरात और अन्य क्षेत्रों में बुनकरों को बुलाकर उन्हें आवास और रोजगार की सुविधायें भी दीं। उन्होने किले की दीवारों से प्रेरित डिजायन में महेश्वरी साड़ियों को भी विशेष पहचान दिलाने का कायर् किया। इसके साथ ही लोकमाता अहिल्याबाई ने 300 वर्ष पूर्व महिला किसानों को मुआवजा दिलाने एवं आथिर्क रुप से सशक्त बनाने के लिये महिलाओं को सम्पत्ति में अधिकार प्रदान करने का कायर् किया। उन्होने कहा कि भारत वर्ष की महिलायें प्रतिभावान एवं सशक्त हैं, जिसको आधार मानते हुये हमारे देश के प्रधानमंत्री द्वारा हाल ही में आंतकवाद को सबक सिखाने के लिये आपरेशन सिन्दूर अभियान चलाया। रानी अहिल्याबाई ने अपने सम्पूणर् जीवन में अपने राज्य के प्रजा का पोषण किया। हम सभी को उनके प्रेरणादायी प्रसंगों को शहर एवं गांव तक पहुंचाने में सहयोग करना चाहिए, जिससे हमारे परिवार की महिलायें अपने जीवन में आने वाली समस्याओं का डटकर सामना कर सके। कायर्क्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष पवन कुमार गौतम ने अपने सम्बोधन में कहा कि आज लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की त्रिशताब्दी के अवसर पर जिला स्तरीय समिति द्वारा इस गोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। उन्होने बताया कि वर्ष 2014 के पश्चात से जिला प्रशासन द्वारा शासन के निदेर्शानुसार हमारे देश के वीर सपूतों एवं वीरांगनाओं की जयंती को मनाने का कार्य किया जा रहा है। कालांतर में इस कार्य का शुभारम्भ लौहपुरुष सरदार बल्लभभाई पटेल जी के नेतृत्व में किया गया, जिन्होने हमारे देश को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया। उन्होने कहा कि वतर्मान सरकार के निर्देशन में जिला प्रशासन के माध्यम से स्वतन्त्रता संग्राम सैनानियों के चित्र को शिलापट्ट पर ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र में स्थापित करने का कार्य किया जा रहा है। उन्होने कहा कि रानी अहिल्याबाई होल्कर की न्याय व्यवस्था के कारण प्रजा उन्हें साक्षात धर्म का रुप मानती थीं। रानी अहिल्याबाई ने कुशल प्रशासक के रुप में कार्य करते हुये देशभर के मन्दिरों, कुओं, धमर्शालाओं और घाटों का निमार्ण कराया, जिनमें काशी, गया, सोमनाथ, द्वारका, रामेश्वरम जैसे तीर्थ स्थलों का विशेष उल्लेखनीय योगदान है। इस अवसर पर जिलाध्यक्ष महानगर हेमन्त परिहार ने कहा कि माता अहिल्याबाई होल्कर बाल्यकाल से ही भगवान शिव की उपासक रहीं। उन्होने कहा कि महाराजा मल्हार राव होल्कर ने बाल्यकाल में माता अहिल्याबाई के श्रीमुख से श्री शिव स्तुति सुनकर उन्हे अपनी पुत्रवधु बनाने का निर्णय किया। माता अहिल्याबाई ने अपने जीवन में कठिन संघर्षों के पश्चात भी देश में अनेक मन्दिरों एवं अन्य निमार्ण इकाईयों का जीर्णोद्वार कराने का कार्य किया, इसके साथ ही उन्होने नारी शक्ति को सशक्त बनाने के लिये भी महिलाओं के मान-सम्मान को बढ़ाने के उद्देश्य से नारी शिक्षा पर बल दिया। कायर्क्रम की रुपरेखा प्रस्तुत करते हुये बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय झांसी में हिन्दी प्रभाग के प्रोफेसर मुन्ना तिवारी ने बताया कि 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जनपद स्थित चांडी ग्राम में जन्मी माता अहिल्याबाई होल्कर, प्रारम्भ से ही विलक्षण प्रतिभा एवं प्रखर बुद्धि की धनी थीं। उनके पिता मानकोजी शिंदे मराठा साम्राज्य में पाटिल के पद पर कायर्रत थे, जिन्होने अपनी पुत्री को मयार्दा, नीति और धर्म का संस्कार बाल्यकाल से ही दिया। उन्होने कहा कि विवाह के उपरान्त माता अहिल्याबाई होल्कर मालवा राज्य की वधु बनीं और कालांतर में राज्य की महारानी भी हुईं। युद्ध में पति खाण्डेराव की मृत्यु एवं ससुर मल्हार राव के निधन और अन्त में अपने इकलौते पुत्र मालेराव की असामयिक मृत्यु जैसे आघातों के बाद भी 11 दिसम्बर 1767 को जब उन्हें विधिवत राज्याभिषेक कर राजसिंहासन सौंपा गया तब उन्होने राज्य को स्थायित्व देने के साथ-साथ अपनी दूर दृष्टि, न्यायप्रियता और धमर्निष्ठा से उसे समृद्धि की ओर अग्रसर भी किया। कायर्क्रम में शासन द्वारा नामित लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की त्रिशताब्दी कायर्क्रम की संयोजिका सदस्य विधान परिषद उ0प्र0 श्रीमती रमा निरंजन द्वारा उपस्थित जनप्रतिनिधियों के कायर्क्रम की सफलता का आभार व्यक्त करते हुये कहा गया कि हमारी मातृशक्ति को रानी अहिल्याबाई होल्कर के विचारों एवं संस्कारों का अपने जीवन में अनुसरण करना चाहिए, जिससे वह अपने जीवन में आने वाले संघर्षों का सामना करते हुये महारानी अहिल्याबाई एवं वीरांगना लक्ष्मीबाई जी का उदाहरण बन सके। कायर्क्रम में मुख्य विकास अधिकारी जुनैद अहमद, जिला विकास अधिकार सुनील कुमार, उप निदेशक संस्कृति विभाग डाॅ0 मनोज कुमार गौतम, उपायुक्त स्वतः रोजगार ब्रजमोहन अम्बेड, जिला विद्यालय निरीक्षक श्रीमती रती वमार्, जिला प्रोबेशन अधिकारी सुरेन्द्र कुमार पटेल, जिला पंचायत राज अधिकारी बालगोविन्द श्रीवास्तव, क्षेत्रीय पयर्टन अधिकारी श्रीमती कीर्ति शुक्ला, सहायक निदेशक सूचना सुरजीत सिंह, अपर जिला सूचना अधिकारी सुरेन्द्र पाल सिंह सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा






