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पर्युषण दसलक्षण पर्व के अंतिम दिन उमड़ा भक्ति का सैलाब….गूंजे जयकारे अनंत चतुर्दशी के साथ पर्युषण दशलक्षण पर्व का समापन

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झांसी। पर्वाधिराज पर्युषण दसलक्षण पर्व के अंतिम दसवें दिन “उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म” की आराधना की गई। नगर के समस्त जैन मन्दिरों में प्रातःकाल से सायंकाल तक जयकारे गूंजते रहे। धोती दुपट्टा पहने श्रावक भगवान का अभिषेक शांतिधारा करते नजर आए। पूजन पाठ के अर्घ्य सुनाई दिए। भगवान की पूजा – विधान, स्तुति, आरती करते हुए श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। ऐसा लगा कि जैसे आध्यात्मिक भक्ति का सैलाब आया हो। इस अवसर पर प्रातःकाल की बेला में मेडिकल कॉलेज गेट नं 3 के आगे निर्माणाधीन भगवान महावीर महातीर्थ में मुनिश्री अविचलसागरजी महाराज के मंगल सान्निध्य में पार्श्वनाथ भगवान के मस्तक पर शांतिधारा करने का सौभाग्य चातुर्मास समिति के मुख्य सलाहकार डॉ राजीव जैन, उपाध्यक्ष कमलेश जैन (जैन हैन्डलूम) को प्राप्त हुआ। इसके पूर्व स्वागताध्यक्ष अंकित सर्राफ, वरिष्ठ महामंत्री दिनेश जैन डीके, महामंत्री सौरभ जैन सर्वज्ञ, कार्यक्रम संयोजक निशांत जैन डेयरी, नितिन जैन सदर, देवेश जैन केडी, अंशुल जैन बघेरा, शुभम जैन जैरी, अर्पित जैन अनि, हर्ष जैन, अनिल जैन, काव्यांश जैन ने श्रीजी का जलाभिषेक किया। तदोपरांत श्रीमति अंजलि सिंघई, सीमा जैन सदर, प्रतिभा जैन, पूजा जैन, सोनम जैन, डॉ शिवी जैन, सेजल जैन, आर्ची जैन, दिविशा जैन, प्रियंका जैन ने जैन दर्शन के बारहवें तीर्थंकर श्री बासुपूज्य भगवान के मोक्षकल्याणक महोत्सव के अवसर पर निर्वाण लाड़ू समर्पित किया। इसके उपरांत मुनिश्री अविचलसागरजी महाराज भगवान महावीर लोक कल्याण परिसर से पदविहार करके शहर के गांधी रोड स्थित श्री दिगम्बर जैन पंचायती बड़ा मन्दिर पहुंचे इस दौरान जगह जगह श्रद्धालुओं ने उनका पादप्रक्षालन एवं आरती करके मंगल आगवानी की। इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री अविचलसागरजी महाराज ने कहा कि उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म, जैन धर्म का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है। यह हमें संयमित रहने और आत्मा के मार्ग पर चलने का संदेश देता है। उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म का मतलब है कि हम अपने मानसिक, भौतिक, और आध्यात्मिक जीवन में संयमित रहें और अपने इंद्रियों को नियंत्रित करें। उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म का मतलब है कि हम ब्रह्म में लीन हों। ब्रह्म का मतलब है आत्मा, ब्रह्मांड, या परमात्मा। उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म का मतलब है कि हम अपनी इच्छा शक्ति को नियंत्रित करें।उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म का मतलब है कि हम संपूर्ण विषयों में अनुराग को दूर करें। इस अवसर पर पंचायत अध्यक्ष अजित कुमार जैन, कोषाध्यक्ष जितेन्द्र चौधरी, अमृत पावन वर्षायोग समिति के अध्यक्ष शैलेन्द्र जैन प्रेस, संरक्षक राजीव जैन सिर्स, जिनेन्द्र सर्राफ, अशोक जैन नीम, पदमचंद मिट्ठया, ऋषभ भण्डारी, करगुंवा मंत्री संजय सिंघई, अलोक जैन विश्वपरिवार, प्रदीप जैन महरौनी, अलंकार जैन, गौतम जैन, विनय जैन सोनू, आनन्द जैन वारे, सुकमाल जैन बड़ागांव, अनिल जैनको, मोंटू ड्योढीया, रविन्द्र जैन नारियल, वीरेन्द्र जैन बुढ़पुरा, अनिल बाजा, प्रमोद जैन बब्बा, रविन्द्र जैन कोरियर, सम्यक भण्डारी, आशीष जैन माची, मासूम जैन, अमन जैन विरागप्रिय, दीपांक सिंघई, साकेत जैन, रवि जैन, मयंक जैन सनी, आग्रह जैन, अविनाश मढ़वैया, राहुल जैन, रवि जैन, यश सिंघई, सौरभराज जैन, दिव्यांश सिंघई, संजीव जैन गिफ्ट, जिनेन्द्र जैन खरों, जैन महिला समाज की अध्यक्षा श्रीमति सरोज जैन के नेतृत्व में रजनी जैन जैनको, रंजना जैन, नेहा जैन, मेघा जैन, दीप्ति जैन, संगीता जैन, रूपम जैन, निकिता जैन, मधु सिंघई, अर्चना जैन, ऊषा जैन, रश्मि भण्डारी, मीना जैनको, श्वेता सर्राफ, नीलम जैन, रागिनी जैन, प्रीति जैन, राखी जैन, शालू जैन सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने मुनिश्री के चरणों में श्रीफल भेंट किया। सौरभ जैन (बैंक) ने संगीतमय पूजन संपन्न कराई। कार्यक्रम का संचालन पंचायत महामंत्री वरुण जैन एवं चातुर्मास महामंत्री सौरभ जैन सर्वज्ञ ने संयुक्त रूप से किया। आभार बड़ा मन्दिर मंत्री सुनील जैनको ने व्यक्त किया।

 

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*• रविवार 7 सितम्बर को कटरा जैन मंदिर से निकलेगी श्रीजी की विशाल शोभायात्रा… होगा वार्षिक कलशाभिषेक समारोह*

मंदिर पदाधिकारी कमलेश जैन (रोहित गारमेंट्स) ने बताया कि रविवार 7 सितम्बर को दोपहर 1 बजे से शहर क्षेत्र के कटरा जैन मंदिर से श्रीजी की विशाल शोभायात्रा निकाली जाएगी जो नगर भ्रमण करते हुए वापिस कटरा बाजार पहुंचेगी जहां मुनिश्री अविचलसागरजी महाराज के मंगल सान्निध्य में वार्षिक कलशाभिषेक समारोह संपन्न होगा।

रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

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