July 14, 2024

तीन दिवसीय मछली स्वास्थ्य प्रबंधन एवं रोग निदान प्रशिक्षण संपन्न

झाँसी। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली-मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान, मुम्बई एवं रानी लक्ष्मी बाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी के संयुक्त तत्त्वाधान में अनुसूचित जाति उप-योजना (एससी एसपी) के अंतर्गत तीन दिवसीय मछली स्वास्थ्य प्रबंधन एवं रोग निदान प्रशिक्षण आज संपन्न हुआ । इसमें बुंदेलखण्ड क्षेत्र के मछली पालकों को मछली रोग की पहचान के साथ साथ उसका निराकरण करना सीखाया गया। कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने इस अवसर पर किसानों को मत्स्य रोग की निदान से सम्बंधित बातों को हमेशा ध्यान में रखने की एवं उत्पादन बढ़ाने की सलाह दी । डॉ. संजय शुक्ला, पूर्व मत्स्य संयुक्त निदेशक झाँसी ने प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान को अपनाने की सलाह दी हैं । निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. एसएस सिंह ने कहा कि बुंदेलखण्ड क्षेत्र के मछली पालक मत्स्य रोग निदान कर उत्कृष्ट मछली बीज उत्पादन में सक्षम होंगे । अधिष्ठाता मात्स्यिकी महाविद्यालय डॉ. बीके बेहेरा ने बुंदेलखण्ड के मछली पालकों को इस प्रशिक्षण के तहत इस क्षेत्र में परिलक्षित मत्स्य रोगों के निदान से सम्बंधित सलाह दी । उन्होंने कहा इसमें मुख्यतः मछली के सामान्य रोग एवं उनका निदान, मछली पालने के पहले एवं बाद में विशेष जानकारी, ब्रूडर मछलियों का स्वास्थ्य प्रबंधन इत्यादि पर मछली पलक प्रशिक्षित हुए। आज अंतिम दिवस मत्स्य पालकों को अग्रिम पंक्ति प्रदर्शनी हेतु कुलपति द्वारा मछली बीज एवं चारा दिया गया। इस अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन के तहत झाँसी एवं दतिया जिले के किसानों को २०००० अन्गुलिकाएं एवं ८ कुंटल मत्स्य चारा प्रदान किया गया । इस प्रकार के प्रशिक्षण द्वारा इस क्षेत्र के मछली पालक आत्म निर्भर हो सकेंगे एवं अन्य राज्यों पर निर्भरता भी ख़त्म होगी। इस प्रशिक्षण में झाँसी एवं दतिया जिले के 25 किसानों ने भाग लिया। इनमें अधिकांश किशोर एवं महिलाएँ शामिल थी । अंत में सभी प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण का प्रमाण पत्र प्रदान किया गया । इस अवसर पर डॉ नीलेश कुमार, डॉ. पार्थ सारथी त्रिपाठी, डॉ. संजीव कुमार, सत्यनारायण परिडा, अजय कुमार राउत, चरन सिंह कुशवाहा आदि उपस्थित रहे।

रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा