July 14, 2024

फूलों की खेती पर तीन दिवसीय किसान प्रशिक्षण का हुआ शुभारम्भ

झाँसी। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी के पुष्प एवं भूदृश्य निर्माण विभाग उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय द्वारा किसानों की आयवर्धन हेतु उन्नत तकनीक द्वारा फूलों की खेती पर तीन दिवसीय किसान प्रशिक्षण का शुभारम्भ कुलपति डाॅ. अशोक कुमार सिंह, प्रसार शिक्षा निदेशक डाॅ. एसएस सिंह, अधिष्ठाता उद्यानिकी एवं वानिकी डाॅ. एमजे डोबरियाल, विभागाध्यक्ष पुष्प एवं भूदृश्य विभाग डाॅ. गौरव शर्मा ने संयुक्त रूप से दीपप्रज्जवलित कर किया। प्रशिक्षणार्थियों को कुलपति ने विवि द्वारा तैयार किया गया उन्नत तकनीक का गेंदे एवं गुलदाउदी का बीज तथा देशी गुलाब की पौध दी। डाॅ गौरव शर्मा ने कहा कि बुन्देलखण्ड में फूलों की खेती की अपार संभावनाएं हैं। झाँसी नगर में ही अन्र्तराष्ट्रीय स्तर के कई स्मारक, किले एवं अन्य इमारतें हैं। जिन पर फूलों की मांग हमेशा ही बनी रहती है। मध्य प्रदेश में 38 हजार हेक्टेयर एवं उत्तर प्रदेश में 22 हजार हैक्टेयर पर फूलों की खेती हो रही है। इस प्रशिक्षण में झाँसी, मूरैना, बड़ागांव, चिरगांव आदि जगह से 25 से अधिक किसान एवं विवि फूल विभाग के विद्यार्थी इस प्रशिक्षण में सम्मिलित हैं। डाॅ. एमजे डोबरियाल ने कहा कि बुंदेलखण्ड क्षेत्र में फूलों की खेती बढ़ी है। झाँसी नगर में ही फूलों की मांग काफी ज्यादा होती है। इसमें कम जगह में फूल उत्पादन कर कैसे लें अधिक लाभ, बाजार, फूल रोग, मूल्य संबर्धन, कट फ्लावर एवं अन्य विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें विवि के पीजी एवं स्नातक के विद्यार्थी भी भाग ले रहे हैं। किसानों को विवि के फूल प्रक्षेत्र भी दिखाया जाएगा। डाॅ. एसएस सिंह ने कहा कि फूल आय का बढ़ा साधन हो सकता है। मंदिर के साथ – साथ शादी समारोह में फूलों की मांग हमेशा ही रही है। बल्कि कम पड़ने पर थाइलेंड से भी फूल मंगाए जाते हैं। विवि ने फूल उत्पादक किसानों को प्रथम पंक्ति प्रदर्शन के अन्र्तगत गेंदा की खेती कराई थी। जिसका लाभ उनको अत्यधिक मिला। उन्होंने कहा कि दलहनी खेती के आस-पास यदि फूलों की खेती कर दी जाय तो दलहनी फसल में कीट नहीं लगते हैं। प्रशिक्षण ले रहे किसानों से उन्होंने कहा कि यदि आप फूलों की खेती समूह में करेंगे तो विवि आपको फरूखाबाद एवं अन्य व्यवसायिक लाभ से जुड़वा देगा। कुलपति डाॅ. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि फूल सबको प्रिय हैं। उसी प्रकार फूल की खेती में लाभ भी है। फूल कई तरह से व्यवसायिक उपयोग में आते हैं। फूल से इत्र, सेन्ट, गुलकंद एवं आयुर्वेदिक दवाए भी बनते हैं। अनेक देश ऐसे हें जहां रोज फूल खरीदे जाते हैं बुंदेलखण्ड में भी फूलों की मांग बढ़ी है। यहां किसान पाॅलीहाऊस में भी फूलों की खेती कर रहे हैं। उन्होंने अफ्रीका का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां का किसान काफी पिछड़ेपन में आता था। लेकिन आज 80 हैक्टेयर में किसान फूलों की खेती कर रहा है। वहां पर विभिन्न पाॅली हाऊस में फूल की खेती की जा रही है और उनका लाभ वहां के किसान उठा रहे हैं। वहां खेती भारत के लोग कर रहे हैं। बुंदेलखण्ड में फूलों की खेती करना और भी आसान है यहां फूलों में पानी भी कम लगता है। बुंदेलखण्ड क्षेत्र में फूल की खेती में कैसे किसान बड़े इस पर पुष्प वैज्ञानिकों को कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से कहा कि फूलों की खेती में आमदनी अधिक है अनाज की खेती की अपेक्षा। इस प्रशिक्षण में जो भी आप सीखें उसको अपनाएं अवश्य तभी प्रशिक्षण का लाभ मिलेगा। इस अवसर पर डाॅ. अनीता पुयाम, डाॅ. उमेश पंकज, डाॅ. घनश्याम अब्रोल, डाॅ. ब्रिजविहारी शर्मा, रोहित श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे। संचालन डाॅ. प्रियंका शर्मा ने एवं डाॅ. प्रिंस कुमार ने सभी का आभार व्यक्त किया।

रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा